Sunday, 30 June 2013

तुम्हारे साथ .....

ओ तरुणी
मेरे आंसू
तेरे दुख
कम नहीं कर पाएँगे
मेरी संवेदनाएँ

तेरे जख्म  नहीं भर पायेंगे 
तार -तार हैं सपने तेरे
रोम रोम में जहर भर गए
कुंठित होगा मन का कोना
घृणा के ज्वार पे तुम सवार
बदले की आग में भी जलोगी
ना कुछ करने की विवशता
आत्महत्या के लिए प्रेरित करेगी
 मेरी अनजान सखी  
एक विनती
 मेरी बस सुन लो
आसुंओ की काल कोठरी में
जीवन मत खोना
गमो की पोटली मत ढोना
सच मानो
ईश्वर ने तुम्हें गर
नरक दिया है तो
स्वर्ग का रास्ता भी
कंही खुला रखा होगा
बस
हिम्मत मत हारना
तप कर तुझे
सोना बनना है
 ओ दामिनी
कल तक
जो भी सपने थे तेरे
भूल उसे अब
आगे बढ़ना होगा
लाचार तुम नहीं
व्यवस्था पंगु है
पहचान अपनी शक्ति को
तुझे ध्रुव तारा सा चमकना  होगा
पोंछ कर सारी तस्वीर
दे  अपनी तरुणाई को
नया आधार
चुन नए पथ को
रख मजबूती से
अपने कदमो को 
नाप नया आकाश  
तुम जानो या ना जानो
मानो या ना मानो
हमारी दुआएं
है तुम्हारे आस पास 
तुम्हारे  साथ   /









Thursday, 20 June 2013

पाखण्ड





पाखण्ड का नकाब
पहने हैं सब जनाब
सब मानते हैं
दुनिया है रंगमंच
तो क्यूँ ना पहने
रंग- बिरंगे मुखौटे
और करे नित्य प्रपंच
धर्म तो है बहाना
पाखण्ड का बुन ताना- बाना
बनाते स्वर्ग –नर्क के मापदंड
फिर खोलते  धर्म की दूकान
भले कोई भी हो नाम
सबका एक ही है काम
सजाये स्वर्ग –नर्क के द्वार
और भरमाते  दिखा के
पाप- पुण्य , दंड के  कई  विधान
फंसे जिसमे आमजन तमाम
मार्केटिंग होती जबर्रदस्त
होते रेट  अलग-अलग
सिक्के  खन्न खनकाओ
हरे नोट  बिछाओ
आडम्बर  खूब फैलाओ
धुप –बत्ती की मधुर सुगंध
जो कर दे तुम्हे मलंग
औ फिर दिख जाए स्वर्ग के द्वार
गर नहीं है कर सकते  जेब गर्म
तो  बस समझ लो  भईया
खुले है नर्क के द्वार
नहीं कोई  कर सकता
तुम्हारा  उद्धार...