Friday, 29 August 2014

क्या ये हमारी संस्कृति के अंग नहीं हैं ?





क्या आपको याद है ... आपने आखरी बार कब डुगडुगी की आवाज सुनी थी ?कब अपनी गली या घर के रास्ते में एक छोटी सी सांवली लड़की को दो मामूली से बांस के फट्टियों के बीच एक पतली सी रस्सी पर चलते देखा और फिर हैरतअंगेज गुलाटी मारते, बिना किसी सुरक्षा इन्तमाजात के | सोचिये , दिमाग पर जोर डालिए !!!

            चलिए आज मैं याद दिलाती हूँ | याद है बचपन में जब स्कुल से आकर आप अपना बस्ता फेंक ,माँ के हिदायत पर हाथ मुँह धोकर ,कपडें बदल कर अपने दोस्तों के साथ झटपट खेलने जाने के मुड में होते थे तब गली से एक चुम्बकीय आवाज आती थी,घर में बैठे हो या वहाँ से गुजर रहे हों उसके खास किस्म के जादुई आवाज के मोह्पास से बंध खड़े हो जाते | सुनिए सुनिए !! गौर से सुनिए डुगडुगी के साथ, साहेबान ,मेहरबान , कद्रदान ...हिन्दुओं को राम राम , मुसलमान भाइयों को सलाम ........ आइये आइये ऐसा जबर्दस्त तमाशा दिखाऊंगा की दिल थाम कर रह जायेंगे | किसी को मलाल न होगा कि क्यों देखने गए थे | इसे देखने के बाद आप राजकपूर की “आवारा” या शोले की गब्बर हो या बसंती सब को भूल जायेंगे | याद रहेगा तो सिर्फ और सिर्फ इस नाचीज का तमाशा |

        

हाँ तो मेहरबान , कद्रदान ,साहेबान इस खेल और तमाशे का पूरा मजा लेना चाहते हैं तो अंतिम तक खड़े रहना होगा इसके बदले ना मैं पैसा मांगता हूँ ,ना ही टिकट, सिनेमा देखने जायेंगे तो टिकेट लगेगा, पैसे लगेगें पर यहाँ बिलकुल फ्री | लेकिन यहाँ उससे ज्यादा मजा मिलेगा | घबराइए मत ,ये मदारी आपसे न कुर्सी मांगेगा न धन ,न रोटी ,न राजपाट | कसम ऊपरवाले की .. अगर इसके बदले कुछ मांगूँ तो थूक देना मेरे मुंह पर | साहेबान!! मैं तो आपके जीवन में सिर्फ और सिर्फ खुशियाँ देना चाहता हूँ ..आपके जीवन से कुछ देर के लिए तनाव को दूर कर दूंगा , ये मेरा वादा है |

लीजिये अब खेल शुरू होता है , अब सबसे पहले जोर से ताली बजाइए | अरे ये क्या बीवी ने खाना नहीं दिया |प्रेमिका ने दिल तोड़ दिया या दफ्तर में बॉस ने डाटा है |भूल जाइए सब कुछ ,सारे रंजो गम, ताली बजाइए !!! जोर से और जोर से, ये हुई न बात|

उसके साथ होता एक छोटी सी लड़की , एक लड़का , एक पिटारा,और चादर| देखते, देखते पता नहीं क्या करता, लडकी गायब हो जाती ,फिर जोर से तालियाँ बजती ,लोगों की सांसे थमी रहती और आँखें फैली .. अनहोनी होने वाली थी ..लड़के का छाती फाड़कर लाल खून सने उसके कलेजे को हाथ में लेकर हौलनाक दृश्य पैदा करता, ज्यादातर बच्चे भाग खड़े होते या घरवालों द्वारा बुला लिए जाते ..इधर तमाशा चरम पर , तालियाँ बहुत तेज बजती, लड़का खून से लथपथ दर्द से छटपटाता रहता ..तालियाँ बजती रहती, मदारी का चेहरा गुस्से में लाल ,, कहता बेहद बेरहम और संगदिल हैं आप सब ! आप के अंदर इंसानियत मर चुकी है| मैं आप सबको खेल दिखा कर शर्मसार हूँ, मैंने एक बार तालियाँ बजाने को क्या कही और आप लोगों ने हदकर दी | एक जवान लड़की दिन दहाड़े शहर की भीड़ से गायब हो गयी |तालियाँ बजा रहे हैं आप |सरेआम एक मासूम बच्चे का कत्ल हो गया तब भी आप तालियाँ पिट रहें हैं आप | हैरान हूँ मैं !!!

क्या आप नहीं चाहते हैं की लड़की वापस लौटे , बच्चा जिन्दा हो जाए/भीड़ से आवाज आती “हम चाहते हैं” तो इसके लिए आपको प्रायश्चित होगा ..सबको एक रूपये २ रूपये ५, १०,२०इस कटोरे में डालना होगा तभी लड़की वापस आएगी और ये बच्चा जिन्दा हो पयेगा वर्ना मैं चला | बाकी आप जाने ,आपकी इंसानियत जाने ! मेरा खेल खत्म ....कटोरा रूपये से भर जाता , लड़की वापस आ जाती ,लड़का भी जिन्दा हो जाता .. सन्देश के साथ उसका मकसद भी पूरा हो जाता |

आपलोगों को लग रह होगा मैं क्या सुना रहीं हूँ, पर अब तो आपको सब याद आ गया होगा |कब देखा था ये मदारी का तमाशा!!!!! ..१० साल ,२० साल ,२५ साल पहले, याद कीजिये ...क्या पता अभी भी आपकी गली में आता होगा पर बच्चे स्कुल से आने के बाद टीवी पे कार्टून शो देख रहे होगें या अपने नए गजेट में खेल रहे होंगे नए गेम और आप अपने बेडरूम के टीवी पर दुनियाभर की ख़बरें सुनने में व्यस्त होंगें .......मदारीवाले की जादुई आवाज आलिशान बड़े बड़े अट्टालिकाओं से टकराकर कर आसमान में गुम हो गयी होगी क्योंकि ac वाले कमरेमें खिड़कियाँ नहीं होती और जिनके यहाँ कूलर हैं वो टीवी के साथ इतनी तेज आवाज करते हैं मदारी की आवाज को पहुचने नहीं देंगें या उस गरीब की क्या औकात की आपके कालोनी से गुजरने भी दिया गया हो !!!!!!!!! उसके मजमे से असुरक्षा का जो ख़तरा है....

क्या आपके बच्चे परिचित भी हैं इस मायावी मदारी वाले से ? और अब कभी होंगे भी नहीं .... क्योंकि ये गुम हो रहे हैं ..विलुप्त जाति के क्षेणी में आने वाले हैं ..

    

जी हाँ ऐसा ही है .. गलियों में प्रदर्शन करनेवाले सभी ..जादूगर , बहुरुपिया , बाजीगर , कलाबाज, बांसुरीवाला ,मदारी ( बंदरों के साथ तमाशा दिखानेवाले),सपेरा सब लुप्त होने के कगार पर हैं .... बचपन में तो करीब सभी लोगों ने तो देखा ही हो होगा! जब मदारी, कोबरा को अपने सधे हाथों से पिटारे से निकालता और उसके फन के सामने बीन बजाता और हम दम साधे बिना पलक झपकाए देखते |या फिर बंदरों को लैला –मजनूं ,सीरी-फ़रहाद, हीर –राँझा बनाकर नाच दिखाना , हँसाना | पर आज वे सिर्फ हमारे लिए याद भर हैं | क्योंकि अब सुरक्षा के नाम पर आपके इलाके में घुसने नहीं दिया जाता और इधर पेटावालों ने जानवरों के अत्याचार के नाम पर कानून बनाकर उनकी सदियों पुरानी रोजी रोटी छीन ली हैं ...सरकार उन्हें नए रोजगार दे नहीं रही और वे इसके अलावे कुछ करना जानते नहीं |

उन्हें सरकार तो सरकार जनता भी उपेक्षित नजरों से देखती हैं ..उन्हें भिखारी समझ कर भगा दिया जाता है ..या फिर उनके मजमें के कारण असामाजिक तत्व ना घुस जाए इस भय से !!

भारत के अलावे चार अन्य देशों में बसी इनकी सात जातियां हैं, जिनका यही पेशा रहा है प्राचीनकाल से| ज्यादातर देशों में इनके सरंक्षण के लिए पॉलिसी बनायीं गयी है, पर भारत में आधुनिकता के दौर में इन्हें भुला दिया गया है | कार पार्किंग के लिए तो जगह है पर इनके लिए आधे घंटे के लिए भी नहीं | ये कहना है जादूगर इश्मुदीन खान का | अब ये कौन है ? तो सुनिए !!!!!!!

हाल में ही एक खबर पर नजर पड़ी .... गलियों में खेल तमाशे दिखानेवाले भूखे मरने की स्थिति में आ गए हैं ... इश्मुदीन खान जो स्वयम गलियों में जादू का तमाशा दिखाने वाले परिवार से हैं उन्होंने इनके सरंक्षण के लिए ISPAT,२०१३ (INDIAN STREET PERFORMER'S ASSOCIATION TRUST ) की स्थापना की और सरकार पर दबाब डाला की इन्हें “कलाकार” की हैसियत से आइडेंटिटी कार्ड देकर और इन्हें अपना हुनर दिखाने की इजाजत दी जाए नहीं तो दस सालों में ये सातों जातियां समाप्त हो जायेगी | खान का कहना है इन्हें सरकार ने सिर्फ अपने स्टाम्प पर ,स्कूल की किताबों में ,और टूरिज्म पोस्टर पर तो शामिल कर लिया है |पर इनके सचमुच के सरंक्षण के लिए कुछ नहीं कर रही | जबकि ये सदियों से हमारे सांस्कृतिक जीवन के हिस्सा हैं | ऑस्ट्रेलिया ,सिंगापूर ,लन्दन और न्यूयार्क में इन्हें लाइसेंस दिया जाता है, उनकी योग्यता के आधार पर ..और उन्हें पूरा मौका दिया जाता है अपने तमाशा दिखने के लिए ,उनके यहाँ कई संस्थाएं काम कर रही हैं, जो उनके साथ दुर्घटना होने पर उनके परिवार को आर्थिक मदद भी देती है |

मैं इश्मुदीन खान से पूरी तरह से सहमत हूँ| क्या आप हैं? हम हमेशा अपनी संस्कृति की बात कर गर्व महसूस करते हैं, तो क्या ये उसका हिस्सा नहीं हैं ? ये भी हमारी सांस्कृतिक धरोहर के महत्वपूर्ण इकाई हैं ... क्या हमारे बचपन की यादें इनके बिना खाली सी नहीं हो जायेगी ???
कॉपीराइट - महिमा श्री 




Sunday, 24 August 2014

लिव इन रिलेशनशिप - गलत सही के बीच सम्बंधो का ताना बाना




Live in relationship….यानि बिना शर्तो का सहजीवन

जब मैं नयी नयी दिल्ली आई थी तो यंहा सभी सार्वजानिक स्थलों पर जैसे पार्क , मॉल , मार्किट , बस स्टैंड , एकांत जैसा प्रतीत होता स्थान कोई भी सार्वजनिक स्थल पर आते जाते लड़के लड़कियों के जोड़े बैठे दिखाई देते या फिर दुनिया जहां से बेखबर अजीब से हरकते करते दिखाई देते की शर्म के मारे हम खुद ही नजर हटा लेते या फिर उस तरफ या उस जगह जाना बंद कर देते / चूँकि नौकरी करने आई थी तो newspaper लेना अनिवार्य था सोचा टाइम्स आफ इंडिया लिया जाए घर पर भी इंग्लिश में टाइम्स ऑफ इंडिया ही लेती थी और बुधवार के एडिशन में टाइम्स accent रोजगार न्यूज़ के लिए विशेष तौर आता है तो उसे लेना शुरू किया / तो उसमे भी चौकाने वाला पेज मिला जो पटना एडिशन में नहीं होता था , दिल्ली एडिशन मे एक पूरा पेज समर्पित है इस तरह के सम्बंधो में उपजे परेशानियों और सुझावों के लिए जो मुझे उस वक्त समझ में नहीं आया था / पूजा बेदी अभी भी शायद इनका जवाब देने के विशेष तौर पर एक कॉलम लिखती है और परामर्श देती हैं /

दिल्ली आने से पहले और टाइम्स ओफ इंडिया के उस पेज को पढने से पहले लिव इन रिलेशनशिप शब्द का कभी नाम भी नहीं सुना था ना पढ़ा था खैर जब पढ़ा तब भी कुछ पल्ले नहीं पड़ा और किसी से सीधे पूछा भी नहीं जा सकता था /

आगे फिर जॉब लग गयी और बात दिमाग से निकल गयी / फेसबुक में यका कदा लोगो के स्टेटस पर भी " इन रिलेशनशिप" जैसा पढने को मिल जाता पर कभी गहराई से समझने की कोशिश नहीं की / ऐसे भी जब चीजो में रूचि नहीं हो तो देर से समझ में आती हैं /

क्या हैं लिव इन रिलेशनशिप ?

अब जब समझ आ ही गया है तो आइये बात करते हैं इस बारे में .लिव इन सम्बन्ध यानी जिसमें स्त्री –पुरुष बिना वैवाहिक बंधन में बंधे एक साथ पति पत्नी की तरह रहते हैं /

इसके कई कारण हो सकते हैं ------------

१, वे शादी के पहले साथ रह कर एक दुसरे की compatibility को परखते हैं उसके बाद विवाह की हामी भरते है या करते हैं

नोट:- compatibility से ये बात ध्यान आया है की आज कहा जा रहा है की इस प्रकार का सम्बन्ध या रिश्ता भारत का नहीं है आयातित है , पाश्चात्य देशों से आया है तो बता दू स्नातक में मेरा एक विषय समाजशास्त्र था और उसमें भारत में फैले सभी समुदायों के रीतिरिवाज और विवाह संस्कार भी पढना विषय का हिस्सा था . उसमे मैंने पढ़ा था उत्तर पूर्व प्रदेशों (मेघालय , नागालैंड , मिजोरम आदि )के समुदायों में और बहुत सारे आदिवासी समाज जैसे छतीसगढ़, झारखण्ड , मध्यप्रदेश और बिहार के कुछ समुदाय में भी विवाहपूर्व compatibility निर्धारण के लिए लड़के और लड़कियों को कुछ हफ्ते और महीने साथ गुजारने होते हैं अगर दोनों संतुष्ट है तभी दोनों के शादी की जाती है / जिसे अब मैं अपनी समझ से लिव इन का संज्ञा दे सकती हूँ भले है उन समुदायों में कोई और नाम होगा / मेरा कहने का बस ये तात्पर्य ही हर गलत लगने वाली चीज को हम पश्चिम से आया कह कर हम अपनी मूढ़ता ही प्रदर्शित करते हैं ..हम इतना भी भोले नहीं है बल्कि हम अपने आपको संस्कारी साबित करने के चक्कर में अच्छा बनने का कुछ ज्यादा ही पाखंड करते हैं जो बेहद शर्मनाक है / बेहतर यही होगा जो अच्छा है उसे स्वीकार करें और जो गलत है उसे सहर्ष स्वीकार कर उसे दूर करें /

२.कई जोड़े प्यार में होते हैं पर माता –पिता के जातिगत कट्टरता या किसी अन्य प्रकार के पारिवारिक विरोध ( लड़का अपने पसंद की लडकी लायेगा तो मनचाहा दहेज नहीं मिलेगा , अथवा लड़का या लड़की अपने स्टेटस की नहीं है वगैरह ) अथवा आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होने की वजह से जिम्मेवारी नहीं ले ना चाहते पर अलग भी नहीं होना चाहते और साथ रहने लगते हैं की जब सक्षम हो जायेंगे तब शादी कर लेंगें /

३.कई जोड़े ऐसे भी होते हैं जहाँ पुरुष शादीशुदा होता है पर अपनी वैवाहिक जीवन से संतुष्ट नहीं होने के कारण विवाह से इतर अपने बराबर सोच और विचार रखने वाली या सुन्दरता से आकृष्ट होकर या फिर आर्थिक रूप से सबल स्त्री के प्रेम पड़कर कर उसके साथ रहने लगता है कई बार शरुआत में लड़की को पता भी नहीं होता की उसका पार्टनर विवाहित है और वे उन्हें खोने के डर से बताते भी नहीं और दोहरा जीवन जीते हैं .. और इस तरह देखा जाता है बहुत सारी जटिलताए अपने आप ही समय के साथ उत्पन्न होती हैं और इसप्रकार का सम्बन्ध ज्यादा लम्बा चलता भी नहीं / कई बार इस प्रकार का सम्बन्ध इसलिए भी बनते है की लड़के का बाल विवाह हुआ होता है .. अथवा लड़की उनकी पसंद की नहीं होती पर पारिवारिक दवाब में आकर शादी करना पड़ा/ अथवा जिस लड़की से शादी करना चाहा उस से नहीं कर पाते पर बाद में उसके साथ सम्बन्ध रखते हैं / ( इसप्रकार के सम्बन्ध हमारे समाज में शुरू से बनते रहे है कारण भले ही बदलते रहे होंऔर उस वक्त इसे लिव इन जैसा शब्द भले ही न रहा हो पर सम्बन्ध तो बनते रहे हैं )

४.कई बार युवा सिर्फ शारीरिक आकर्षण और परिवार से अलग रहने का नाजायज फायदा उठा कर तथा लड़की को विवाह का झूठा वादा कर सिर्फ मौज मस्ती के लिए ऐसे सम्बन्ध बनाते हैं और समाज , परिवार और उस लड़की के भावनाओं को भी ठेस पहुचाते हैं / तथा कई बार लड़के लड़कियां दोनों आपसी सहमती से भी एक दुसरे के आकर्षण में पड़ कर बिना आगे पीछे सोचे आवेश में आकर ऐसे सम्बन्ध बना लेते हैं /

समाजिक और क़ानूनी वैधता

(मैं यंहा किसी भी प्रकार की क़ानूनी धारा या पौराणिक उदहारण ले कर नहीं चलूंगी /बस आज की बात करुँगी / )



कानून के अनुसार सभी को अपनी जिन्दगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है .. कानून लिव इन को अवैध नहीं ठहराती पर पर ऐसे सम्बद्ध की पैरवी भी नहीं करती /

कानून और समाज हमेशा से ही विवाह संस्था की पैरवी करता है और सारे अधिकार भी विवाहित जोड़ो के ही पक्ष में घोषित है / लिव इन में लड़की को किसी भी प्रकार की (शारीरिक, मानसिक, या आर्थिक ) क्षति होने पर कोई भी अधिकार का दावा करने के लिए किसी भी प्रकार का ठोस कानून नहीं है/

पर विवाहित स्त्री के साथ किसी भी प्रकार की परेशानी या हानि अपने पति या ससुरालवालों द्वारा की जाती हैं तो उसके लिए कई ठोस कानून हैं और परिवार और समाज का भी पूरा साथ मिलता है /

परन्तु लिव इन में लड़की को सिर्फ उपेक्षा और लान्क्षण के सिवा कुछ भी नहीं मिलता और सभी प्रकार के समस्याओं से उसे अकेले ही झेलना पड़ता है / क्योंकि लिव इन में किसी भी प्रकार का अधिकार तथा जिम्मेवारियां एक दुसरे पे नहीं होती /

इसप्रकार हम देखते हैं की लिव इन में अगर स्वतंत्रता है तो वो सारी परेशानियाँ हैं जो एक स्त्री पुरुष के रिश्ते में होता है पर उसके समाधान का रास्ता काँटों भरा होता है जहाँ लहुलुहान होने पर कोई पूछने भी नहीं आता /

लिव इन अगर लम्बे समय तक कामयाब हो भी जाए तब भी इसमें स्त्री को अपमान और उपेक्षा ही मिलती है जिसका ताजा उदाहरण राजेश खन्ना और उनकी लिव इन पार्टनर अनीता आडवाणी के रिश्ते से पता चला / राजेश खन्ना और डिम्पल कपाडिया का वैवाहिक जीवन मुस्किल भरा ११ साल रहा , फिर दोनों अलग हो गए / उसके बाद राजेश खन्ना की लिव इन पार्टनर रही टीना मुनीम जो सात साल साथ रहीं पर ,राजेश का डिम्पल से तलाक नहीं लेने की वजह और टीना नहीं शादी करने पाने की वजह से अलग हो गई/ फिर उनके जीवन में अनीता आडवाणी आई जिन्होंने राजेश खन्ना का साथ उनके मृत्यु तक दिया / पर खन्ना के मरते ही अनीता जी को राजेश के परिवार ने दूध में गिरे मक्खी की तरह निकाल फेका / कोर्ट में जाने के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला / अफ़सोस की बात है की इतने लम्बे समय तक साथ रहने और ख्याल रखने बाद भी राजेश खन्ना ने अपनी वसीयत दोनों बेटियों के नाम कर दी / उनके बाद अनीता आडवानी का क्या होगा कैसे रहेगी कुछ भी नही सोचा और ना दिया आज अनीता आडवाणी उम्र के 60 वें साल में हैं और कोर्ट और समाज दोनों से उन्हें कुछ भी नहीं मिला /

इसप्रकार हम देखते हैं की विवाह संस्था जितना मजबूत है और लिव इन उतना ही कमजोर /

यदि हम मानव से इतर अन्य प्राणियों को देखे तो पायेंगें की वहां पर हर मादा को पूरी स्वतंत्रता है की किसी भी नर पशु से संबध बनायें/ उनमे ये बहुत ही स्वभाविक स्थिति पायी जाती है और हर सीजन में उनका पार्टनर बदल जाता है / पर मानवजाती ने जैसे सभ्यता का विकास किया उसी दौरान विवाह संस्था की भी नीवं डाली और उसे हर तरह से मजूबत बनाने की कोशिश की गयी /जिसके कई महतवपूर्ण कारण हैं /सभ्य समाज में विवाह के उपरान्त बच्चे के लालन पालन की जिम्मेवारी अकेली महिला नहीं उठाती बल्कि पति पत्नी मिलकर उठाते हैं / हमारे समाज में बच्चों को सुसंस्कारित करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है / और पत्नी पत्नी समाज के सामने विवाह वेदी पर कसमे भी खाते है की हर सुख –दुःख में एक दुसरे का साथ देंगें / स्त्री को विवाह के बाद अनेकों अधिकार प्राप्त होते हैं / विवाह एक सोचो समझी सुविचारित सामाजिक वयवस्था है जिसके कारण समाज और संस्कृति का विकास हो सका है ( भले ही इसमें अब बहुत खामियां आ गयी हो और यंहा भी स्त्रियों की अगर दुर्गति होनी लिखी है तो हो ही जाती है पर सिर्फ कुछ गलत लोगों के दुर्व्यवहार से विवाह संस्था के पवित्र उदेश्य को झुठलाया नहीं जा सकता )

जानवरों में नर की जिम्मेवारी केवल मादा के गर्भधारण करने तक है उसके बाद फिर वो मुड़ के भी नहीं देखता / यही कमोवेश स्थिति लिव इन में भी लड़किओं की होती है अगर उनका सम्बन्ध विवाह तक नहीं पहुचता है तो !!!!!!! उनकी स्थिति की कल्पना करना भी बेहद भयावह है /