Sunday, 24 August 2014

लिव इन रिलेशनशिप - गलत सही के बीच सम्बंधो का ताना बाना




Live in relationship….यानि बिना शर्तो का सहजीवन

जब मैं नयी नयी दिल्ली आई थी तो यंहा सभी सार्वजानिक स्थलों पर जैसे पार्क , मॉल , मार्किट , बस स्टैंड , एकांत जैसा प्रतीत होता स्थान कोई भी सार्वजनिक स्थल पर आते जाते लड़के लड़कियों के जोड़े बैठे दिखाई देते या फिर दुनिया जहां से बेखबर अजीब से हरकते करते दिखाई देते की शर्म के मारे हम खुद ही नजर हटा लेते या फिर उस तरफ या उस जगह जाना बंद कर देते / चूँकि नौकरी करने आई थी तो newspaper लेना अनिवार्य था सोचा टाइम्स आफ इंडिया लिया जाए घर पर भी इंग्लिश में टाइम्स ऑफ इंडिया ही लेती थी और बुधवार के एडिशन में टाइम्स accent रोजगार न्यूज़ के लिए विशेष तौर आता है तो उसे लेना शुरू किया / तो उसमे भी चौकाने वाला पेज मिला जो पटना एडिशन में नहीं होता था , दिल्ली एडिशन मे एक पूरा पेज समर्पित है इस तरह के सम्बंधो में उपजे परेशानियों और सुझावों के लिए जो मुझे उस वक्त समझ में नहीं आया था / पूजा बेदी अभी भी शायद इनका जवाब देने के विशेष तौर पर एक कॉलम लिखती है और परामर्श देती हैं /

दिल्ली आने से पहले और टाइम्स ओफ इंडिया के उस पेज को पढने से पहले लिव इन रिलेशनशिप शब्द का कभी नाम भी नहीं सुना था ना पढ़ा था खैर जब पढ़ा तब भी कुछ पल्ले नहीं पड़ा और किसी से सीधे पूछा भी नहीं जा सकता था /

आगे फिर जॉब लग गयी और बात दिमाग से निकल गयी / फेसबुक में यका कदा लोगो के स्टेटस पर भी " इन रिलेशनशिप" जैसा पढने को मिल जाता पर कभी गहराई से समझने की कोशिश नहीं की / ऐसे भी जब चीजो में रूचि नहीं हो तो देर से समझ में आती हैं /

क्या हैं लिव इन रिलेशनशिप ?

अब जब समझ आ ही गया है तो आइये बात करते हैं इस बारे में .लिव इन सम्बन्ध यानी जिसमें स्त्री –पुरुष बिना वैवाहिक बंधन में बंधे एक साथ पति पत्नी की तरह रहते हैं /

इसके कई कारण हो सकते हैं ------------

१, वे शादी के पहले साथ रह कर एक दुसरे की compatibility को परखते हैं उसके बाद विवाह की हामी भरते है या करते हैं

नोट:- compatibility से ये बात ध्यान आया है की आज कहा जा रहा है की इस प्रकार का सम्बन्ध या रिश्ता भारत का नहीं है आयातित है , पाश्चात्य देशों से आया है तो बता दू स्नातक में मेरा एक विषय समाजशास्त्र था और उसमें भारत में फैले सभी समुदायों के रीतिरिवाज और विवाह संस्कार भी पढना विषय का हिस्सा था . उसमे मैंने पढ़ा था उत्तर पूर्व प्रदेशों (मेघालय , नागालैंड , मिजोरम आदि )के समुदायों में और बहुत सारे आदिवासी समाज जैसे छतीसगढ़, झारखण्ड , मध्यप्रदेश और बिहार के कुछ समुदाय में भी विवाहपूर्व compatibility निर्धारण के लिए लड़के और लड़कियों को कुछ हफ्ते और महीने साथ गुजारने होते हैं अगर दोनों संतुष्ट है तभी दोनों के शादी की जाती है / जिसे अब मैं अपनी समझ से लिव इन का संज्ञा दे सकती हूँ भले है उन समुदायों में कोई और नाम होगा / मेरा कहने का बस ये तात्पर्य ही हर गलत लगने वाली चीज को हम पश्चिम से आया कह कर हम अपनी मूढ़ता ही प्रदर्शित करते हैं ..हम इतना भी भोले नहीं है बल्कि हम अपने आपको संस्कारी साबित करने के चक्कर में अच्छा बनने का कुछ ज्यादा ही पाखंड करते हैं जो बेहद शर्मनाक है / बेहतर यही होगा जो अच्छा है उसे स्वीकार करें और जो गलत है उसे सहर्ष स्वीकार कर उसे दूर करें /

२.कई जोड़े प्यार में होते हैं पर माता –पिता के जातिगत कट्टरता या किसी अन्य प्रकार के पारिवारिक विरोध ( लड़का अपने पसंद की लडकी लायेगा तो मनचाहा दहेज नहीं मिलेगा , अथवा लड़का या लड़की अपने स्टेटस की नहीं है वगैरह ) अथवा आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होने की वजह से जिम्मेवारी नहीं ले ना चाहते पर अलग भी नहीं होना चाहते और साथ रहने लगते हैं की जब सक्षम हो जायेंगे तब शादी कर लेंगें /

३.कई जोड़े ऐसे भी होते हैं जहाँ पुरुष शादीशुदा होता है पर अपनी वैवाहिक जीवन से संतुष्ट नहीं होने के कारण विवाह से इतर अपने बराबर सोच और विचार रखने वाली या सुन्दरता से आकृष्ट होकर या फिर आर्थिक रूप से सबल स्त्री के प्रेम पड़कर कर उसके साथ रहने लगता है कई बार शरुआत में लड़की को पता भी नहीं होता की उसका पार्टनर विवाहित है और वे उन्हें खोने के डर से बताते भी नहीं और दोहरा जीवन जीते हैं .. और इस तरह देखा जाता है बहुत सारी जटिलताए अपने आप ही समय के साथ उत्पन्न होती हैं और इसप्रकार का सम्बन्ध ज्यादा लम्बा चलता भी नहीं / कई बार इस प्रकार का सम्बन्ध इसलिए भी बनते है की लड़के का बाल विवाह हुआ होता है .. अथवा लड़की उनकी पसंद की नहीं होती पर पारिवारिक दवाब में आकर शादी करना पड़ा/ अथवा जिस लड़की से शादी करना चाहा उस से नहीं कर पाते पर बाद में उसके साथ सम्बन्ध रखते हैं / ( इसप्रकार के सम्बन्ध हमारे समाज में शुरू से बनते रहे है कारण भले ही बदलते रहे होंऔर उस वक्त इसे लिव इन जैसा शब्द भले ही न रहा हो पर सम्बन्ध तो बनते रहे हैं )

४.कई बार युवा सिर्फ शारीरिक आकर्षण और परिवार से अलग रहने का नाजायज फायदा उठा कर तथा लड़की को विवाह का झूठा वादा कर सिर्फ मौज मस्ती के लिए ऐसे सम्बन्ध बनाते हैं और समाज , परिवार और उस लड़की के भावनाओं को भी ठेस पहुचाते हैं / तथा कई बार लड़के लड़कियां दोनों आपसी सहमती से भी एक दुसरे के आकर्षण में पड़ कर बिना आगे पीछे सोचे आवेश में आकर ऐसे सम्बन्ध बना लेते हैं /

समाजिक और क़ानूनी वैधता

(मैं यंहा किसी भी प्रकार की क़ानूनी धारा या पौराणिक उदहारण ले कर नहीं चलूंगी /बस आज की बात करुँगी / )



कानून के अनुसार सभी को अपनी जिन्दगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है .. कानून लिव इन को अवैध नहीं ठहराती पर पर ऐसे सम्बद्ध की पैरवी भी नहीं करती /

कानून और समाज हमेशा से ही विवाह संस्था की पैरवी करता है और सारे अधिकार भी विवाहित जोड़ो के ही पक्ष में घोषित है / लिव इन में लड़की को किसी भी प्रकार की (शारीरिक, मानसिक, या आर्थिक ) क्षति होने पर कोई भी अधिकार का दावा करने के लिए किसी भी प्रकार का ठोस कानून नहीं है/

पर विवाहित स्त्री के साथ किसी भी प्रकार की परेशानी या हानि अपने पति या ससुरालवालों द्वारा की जाती हैं तो उसके लिए कई ठोस कानून हैं और परिवार और समाज का भी पूरा साथ मिलता है /

परन्तु लिव इन में लड़की को सिर्फ उपेक्षा और लान्क्षण के सिवा कुछ भी नहीं मिलता और सभी प्रकार के समस्याओं से उसे अकेले ही झेलना पड़ता है / क्योंकि लिव इन में किसी भी प्रकार का अधिकार तथा जिम्मेवारियां एक दुसरे पे नहीं होती /

इसप्रकार हम देखते हैं की लिव इन में अगर स्वतंत्रता है तो वो सारी परेशानियाँ हैं जो एक स्त्री पुरुष के रिश्ते में होता है पर उसके समाधान का रास्ता काँटों भरा होता है जहाँ लहुलुहान होने पर कोई पूछने भी नहीं आता /

लिव इन अगर लम्बे समय तक कामयाब हो भी जाए तब भी इसमें स्त्री को अपमान और उपेक्षा ही मिलती है जिसका ताजा उदाहरण राजेश खन्ना और उनकी लिव इन पार्टनर अनीता आडवाणी के रिश्ते से पता चला / राजेश खन्ना और डिम्पल कपाडिया का वैवाहिक जीवन मुस्किल भरा ११ साल रहा , फिर दोनों अलग हो गए / उसके बाद राजेश खन्ना की लिव इन पार्टनर रही टीना मुनीम जो सात साल साथ रहीं पर ,राजेश का डिम्पल से तलाक नहीं लेने की वजह और टीना नहीं शादी करने पाने की वजह से अलग हो गई/ फिर उनके जीवन में अनीता आडवाणी आई जिन्होंने राजेश खन्ना का साथ उनके मृत्यु तक दिया / पर खन्ना के मरते ही अनीता जी को राजेश के परिवार ने दूध में गिरे मक्खी की तरह निकाल फेका / कोर्ट में जाने के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला / अफ़सोस की बात है की इतने लम्बे समय तक साथ रहने और ख्याल रखने बाद भी राजेश खन्ना ने अपनी वसीयत दोनों बेटियों के नाम कर दी / उनके बाद अनीता आडवानी का क्या होगा कैसे रहेगी कुछ भी नही सोचा और ना दिया आज अनीता आडवाणी उम्र के 60 वें साल में हैं और कोर्ट और समाज दोनों से उन्हें कुछ भी नहीं मिला /

इसप्रकार हम देखते हैं की विवाह संस्था जितना मजबूत है और लिव इन उतना ही कमजोर /

यदि हम मानव से इतर अन्य प्राणियों को देखे तो पायेंगें की वहां पर हर मादा को पूरी स्वतंत्रता है की किसी भी नर पशु से संबध बनायें/ उनमे ये बहुत ही स्वभाविक स्थिति पायी जाती है और हर सीजन में उनका पार्टनर बदल जाता है / पर मानवजाती ने जैसे सभ्यता का विकास किया उसी दौरान विवाह संस्था की भी नीवं डाली और उसे हर तरह से मजूबत बनाने की कोशिश की गयी /जिसके कई महतवपूर्ण कारण हैं /सभ्य समाज में विवाह के उपरान्त बच्चे के लालन पालन की जिम्मेवारी अकेली महिला नहीं उठाती बल्कि पति पत्नी मिलकर उठाते हैं / हमारे समाज में बच्चों को सुसंस्कारित करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है / और पत्नी पत्नी समाज के सामने विवाह वेदी पर कसमे भी खाते है की हर सुख –दुःख में एक दुसरे का साथ देंगें / स्त्री को विवाह के बाद अनेकों अधिकार प्राप्त होते हैं / विवाह एक सोचो समझी सुविचारित सामाजिक वयवस्था है जिसके कारण समाज और संस्कृति का विकास हो सका है ( भले ही इसमें अब बहुत खामियां आ गयी हो और यंहा भी स्त्रियों की अगर दुर्गति होनी लिखी है तो हो ही जाती है पर सिर्फ कुछ गलत लोगों के दुर्व्यवहार से विवाह संस्था के पवित्र उदेश्य को झुठलाया नहीं जा सकता )

जानवरों में नर की जिम्मेवारी केवल मादा के गर्भधारण करने तक है उसके बाद फिर वो मुड़ के भी नहीं देखता / यही कमोवेश स्थिति लिव इन में भी लड़किओं की होती है अगर उनका सम्बन्ध विवाह तक नहीं पहुचता है तो !!!!!!! उनकी स्थिति की कल्पना करना भी बेहद भयावह है /



Post a Comment