Sunday, 1 May 2016

प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यासकार " डॉ शत्रुध्न प्रसाद " को गणेश शंकर विद्यार्थी साहित्य सेवी सम्मान

हिन्दी के प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यासकार " डॉ शत्रुध्न प्रसाद "  को केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा द्वारा पूर्व घोषित गणेश शंकर विद्यार्थी साहित्य सेवी सम्मान (2014) से 19 अप्रैल 2016 को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में अपराहन 1.00 बजे, भव्य समारोह में राष्ट्रपति के हाथों अन्य साहित्यकारों के साथ सम्मानित और पुरस्कृत किया गया .। आप भारतीय इतिहास को उसके विशिष्ट सांस्क़तिक संदर्भों में देखने के हिमायती हैं।
 डॉ शत्रुध्न प्रसाद की  52 वर्षों की साहित्यिक साधना  मौलिक एंव महत्वपूर्ण रचनाएं यथा कविता, समीक्षा और 9 ऐतिहासिक उपन्यासों के रुप में परिणत हुई है। अभी और दो उपन्यास पूर्ण हो कर प्रकाशन की प्रतिक्षा में है। 12 वें उपन्यास का लेखन चल रहा है । त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका "सदानीरा" का संपादन और प्रकाशन भी आपके द्वारा चल रहा है।  सरस्वती सदानीरा , दाराशिकोह दहशत का दंश,  कश्मीर की बेटी, . शिप्रा साक्षी है, . सिद्धियों के खंडहर आदि आपके प्रसिद्ध उपन्यास हैं।

हिंदी के ऐतिहासिक उपन्यासों में काल बोध एवं संस्कृति इनका चर्चित समीक्षा ग्रंथ है।
इसके पहले भी अनेक साहित्यिक सम्मान मिल चुके हैं जिसमें आपके रचनात्मक अवदान के लिए राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त साहित्य सम्मान 2008 भोपाल में प्राप्त हुआ था।

आपके द्वारा रचित उपन्यास...
1.  सिद्धियों के खंडहर
2.
शिप्रा साक्षी है
3.
हेमचन्द्र विक्रमादित्य
4.
सुनो भाई साधो
5.
तुगंभद्रा पर सूर्योदय
6.
कश्मीर की बेटी
7.
अरावली का मुक्त शिखर
8.
शहजादा दारा शिकोह दहशत का दंश
9.
सरस्वती सदानीरा
इस समारोह में अन्य साहित्यकार डॉ देवेन्द्र दीपक, बल्देव वंशी, डॉ सुषम बेदी, डॉ विश्वनाथ तिवारी, डॉ स्नेह ठाकुर, सुधाओम ढींगरा, राजीव कटारा, डॉ बी वै ललिततांबा , सुरेश गौतम, विश्वनाथ सचदेव, बालेंदु शर्मा दधीच, प्रो एस,रहमतुल्ला, शिचिरो सोमा, प्रो. ग. फू. फिंग जैसे कई  देश विदेश के गणमान्य हिन्दी साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।






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